Skip to main content

View in English
हिंदी में देखें


this padding is for avoiding search bar cut

संबंधबोधक (Preposition) | Hindi Grammar | GPN

भाषा में रिश्ते बनाने का काम। जब आप कहते हैं "किताब मेज पर रखी है", तो 'पर' शब्द ही बता रहा है कि किताब का मेज से क्या संबंध है। बिना इसके वाक्य "किताब मेज रखी है" अधूरा और अर्थहीन लगता है। यही हैं संबंधबोधक अव्यय (Preposition) - वे छोटे-छोटे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों से रिश्ता जोड़ते हैं।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 6–7 (परिचय) | कक्षा 8–9 (विस्तार) | कक्षा 10–12 (जटिल प्रयोग)


1️. संबंधबोधक अव्यय (Preposition) का परिचय

एक साधारण सा वाक्य लें: "बच्चा खेल रहा है।" अब इसमें थोड़ा विस्तार करें: "बच्चा मैदान में खेल रहा है।" देखा आपने? 'में' शब्द ने 'बच्चा' और 'मैदान' के बीच एक स्पष्ट संबंध स्थापित कर दिया। यह बता दिया कि खेलने की क्रिया कहाँ हो रही है। संबंधबोधक अव्यय ठीक यही काम करते हैं। ये किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य की क्रिया या दूसरे शब्दों से जोड़ते हैं। बिना इनके, वाक्य के विभिन्न अंग आपस में जुड़े हुए नहीं लगते।

दैनिक जीवन में हम अनगिनत बार इनका प्रयोग करते हैं: "दूध से दही जमता है", "पत्र द्वारा सूचना मिली", "मैं तुम्हारे लिए यह लाया हूँ"। इन वाक्यों में रेखांकित शब्द संबंधबोधक हैं। ये शब्द वाक्य को तार्किक और सुसंगत बनाते हैं, जिससे सुनने वाला आसानी से अर्थ समझ सके।

2. परिभाषा

परिभाषा: वे अव्यय शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के किसी दूसरे शब्द (विशेषकर क्रिया) से बताते हैं, संबंधबोधक अव्यय कहलाते हैं।

3. मुख्य बिंदु / पहचान

संबंधबोधक अव्यय को पहचानने के लिए इन विशेषताओं को ध्यान में रखें:

  • संज्ञा/सर्वनाम के साथ चिपके रहना: ये हमेशा किसी संज्ञा या सर्वनाम के ठीक बाद में आते हैं। जैसे: मेज पर, घर से, उस के बिना
  • संबंध स्थापित करना: इनका मुख्य काम दो शब्दों के बीच संबंध दिखाना है - स्थान, समय, कारण, साधन, उद्देश्य आदि का।
  • अकेले अर्थहीन: इनका स्वतंत्र रूप से कोई पूर्ण अर्थ नहीं होता। ये केवल संबंध बताने का काम करते हैं।
  • पहचान का तरीका: वाक्य से संज्ञा/सर्वनाम के बाद आने वाला छोटा शब्द जो उसका क्रिया या अन्य शब्द से संबंध बता रहा है, संबंधबोधक है।

4. भेद / प्रकार

संबंधबोधक अव्यय को उनके द्वारा दर्शाए जाने वाले संबंध के आधार पर कई भागों में बाँटा जा सकता है। यहाँ कुछ मुख्य प्रकार दिए गए हैं:

क्रम भेद / प्रकार संबंध का प्रकार व उदाहरण
1 स्थानबोधक स्थान का संबंध बताता है।
जैसे: में, पर, नीचे, आगे, पीछे (मकान के सामने)
2 कालबोधक समय का संबंध बताता है।
जैसे: से, तक, में, के दौरान (सुबह से शाम तक)
3 कारणबोधक कारण का संबंध बताता है।
जैसे: से, के कारण, की वजह से (बीमारी के कारण नहीं आया)
4 साधनबोधक साधन या माध्यम का संबंध बताता है।
जैसे: से, द्वारा, के ज़रिए (कलम से लिखो)
5 संगबोधक साथ का संबंध बताता है।
जैसे: के साथ, सहित (दोस्तों के साथ गया)
6 विभाजक/अलगावबोधक अलगाव या तुलना का संबंध बताता है।
जैसे: से, में, की अपेक्षा (राम से श्याम लंबा है)

5. उदाहरण

आइए, विभिन्न प्रकार के संबंधबोधक अव्ययों को वाक्यों में देखें:

  • स्थानबोधक: पक्षी आकाश में उड़ रहे हैं। (कहाँ?)
  • कालबोधक: वह दो घंटे से पढ़ रहा है। (कब से?)
  • कारणबोधक: बारिश के कारण मैच स्थगित हो गया। (क्यों?)
  • साधनबोधक: मैंने फोन द्वारा संदेश भेजा। (किससे?)
  • संगबोधक: मैं अपने परिवार के साथ रहता हूँ। (किसके साथ?)
  • विभाजकबोधक: यह किताब उस किताब से अच्छी है। (किसकी तुलना में?)

6. वाक्य में प्रयोग / प्रयोग की विधि

संबंधबोधक अव्यय का प्रयोग करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हमेशा किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आएगा, उससे पहले नहीं। यह उस संज्ञा/सर्वनाम को वाक्य के किसी अन्य भाग से जोड़ेगा। जैसे: "मैंने तुम्हारे लिए उपहार खरीदा है।" यहाँ 'लिए' सर्वनाम 'तुम्हारे' के बाद आकर उसका संबंध क्रिया 'खरीदा' से बता रहा है (उद्देश्य)। गलती से अगर हम कहें "मैंने लिए तुम्हारे उपहार...", तो वाक्य टूट जाता है।

7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ

संबंधबोधक अव्यय को अक्सर क्रियाविशेषण या समुच्चयबोधक अव्यय से भ्रमित कर दिया जाता है, क्योंकि कई शब्द एक से अधिक भूमिका निभा सकते हैं।

  • क्रियाविशेषण vs संबंधबोधक: क्रियाविशेषण सीधे क्रिया की विशेषता बताता है, जबकि संबंधबोधक संज्ञा/सर्वनाम का संबंध बताता है। जैसे: वह आगे बढ़ा। (क्रियाविशेषण - कैसे बढ़ा?)। मेरे घर के आगे पार्क है। (संबंधबोधक - 'घर' का 'पार्क' से स्थान संबंध)।
  • 'से' का भ्रम: 'से' शब्द हिंदी में सबसे बहुमुखी है। यह कर्ताकारक, अपादान कारक, संबंधबोधक और तुलनाबोधक अव्यय सभी के रूप में आ सकता है। संदर्भ से ही पहचान होगी।
  • समुच्चयबोधक से अंतर: समुच्चयबोधक दो वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ता है (जैसे: और, परंतु)। संबंधबोधक एक संज्ञा का दूसरे शब्द से संबंध बताता है।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • संबंधबोधक अव्यय सदैव संज्ञा या सर्वनाम के बाद आते हैं। (महत्वपूर्ण नियम)
  • ये दो शब्दों के बीच स्थान, समय, कारण, साधन, साथ आदि का संबंध स्थापित करते हैं। (परिभाषा)
  • 'में', 'पर', 'से', 'तक', 'द्वारा', 'के लिए', 'के साथ' आदि प्रमुख संबंधबोधक हैं। (उदाहरण)
  • संबंधबोधक अव्यय का स्वतंत्र अर्थ नहीं होता, यह केवल संबंध बताता है। (विशेषता)
  • कभी-कभी दो या तीन शब्द मिलकर भी संबंधबोधक बनते हैं, जैसे: 'के बिना', 'के पास', 'के सामने'। (यौगिक संबंधबोधक)

9. 🎯 संबंधबोधक अव्यय (Preposition) आधारित चुनौती

संबंधबोधक अव्यय की पकड़ मज़बूत करने के लिए इन चुनौतीपूर्ण प्रश्नों को हल करें।

1. 'वह मेरे घर आया।' और 'वह मेरे घर के पास आया।' इन दोनों वाक्यों में अर्थ का क्या अंतर है? 'के पास' क्या भूमिका निभा रहा है?

उत्तर: पहले वाक्य का अर्थ है कि वह सीधे घर के अंदर या प्रवेश द्वार तक आया। दूसरे वाक्य में 'के पास' एक स्थानबोधक संबंधबोधक है जो बता रहा है कि वह घर के निकट/समीप आया, जरूरी नहीं कि अंदर ही आया हो। 'के पास' ने 'घर' और 'आया' क्रिया के बीच स्थान संबंध को स्पष्ट किया है।

2. 'मैं उससे मिला।' वाक्य में 'से' क्या है? क्या यह संबंधबोधक अव्यय है? समझाइए।

उत्तर: इस वाक्य में 'से' एक कर्मकारक की विभक्ति है, संबंधबोधक अव्यय नहीं। यहाँ 'उससे' में 'से' सर्वनाम 'उस' के साथ जुड़कर क्रिया 'मिला' का कर्म बना रहा है (मैंने किससे मिला? - उससे)। संबंधबोधक होने के लिए यह दो शब्दों का संबंध बताता, जबकि यहाँ यह केवल कर्म का चिह्न है।

3. 'तुम्हारे बिना यह काम असंभव है।' वाक्य में संबंधबोधक अव्यय कौन-सा है और यह किस प्रकार का संबंध बता रहा है?

उत्तर: संबंधबोधक अव्यय: 'बिना' (या पूरा वाक्यांश 'तुम्हारे बिना')।
संबंध का प्रकार: यह एक अभाव या अपवर्जन (Exclusion) का संबंध बता रहा है। यह दर्शाता है कि 'तुम' के अभाव में काम असंभव है। इसे कारणबोधक या स्थितिबोधक भी माना जा सकता है।

4. 'के अनुसार', 'के विरुद्ध', 'के बारे में' - क्या ये संबंधबोधक हैं? इनमें क्या समानता है?

उत्तर: हाँ, ये सभी यौगिक संबंधबोधक अव्यय हैं (दो या तीन शब्दों से मिलकर बने हैं)।
समानता: सभी 'के' शब्द से शुरू होते हैं और किसी संज्ञा/सर्वनाम के बाद आकर एक विशिष्ट प्रकार का संबंध बताते हैं। 'के अनुसार' (अनुरूपता), 'के विरुद्ध' (विपरीतता), 'के बारे में' (विषय)।

5. क्या 'पर' शब्द हमेशा संबंधबोधक ही होता है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: नहीं, 'पर' शब्द संबंधबोधक के अलावा समुच्चयबोधक अव्यय के रूप में भी प्रयुक्त हो सकता है।
संबंधबोधक: किताब मेज पर रखी है। (स्थान संबंध)
समुच्चयबोधक: मैंने बहुत कोशिश की, पर सफल नहीं हुआ। (यहाँ 'पर' का अर्थ 'किंतु/लेकिन' है, यह दो वाक्यों को जोड़ रहा है।)

6. 'मैं दिल्ली जा रहा हूँ।' क्या इस वाक्य में कोई संबंधबोधक है? यदि नहीं, तो इसमें 'दिल्ली' और 'जा रहा हूँ' का संबंध कैसे स्थापित है?

उत्तर: इस वाक्य में कोई संबंधबोधक अव्यय नहीं है। यहाँ 'दिल्ली' और 'जा रहा हूँ' का संबंध कारक विभक्ति के माध्यम से स्थापित है। 'दिल्ली' यहाँ द्वितीया कारक (कर्म कारक) में है, हालाँकि विभक्ति चिह्न 'को' लुप्त है। पूरा वाक्य 'मैं दिल्ली को जा रहा हूँ' का संक्षिप्त रूप है। कर्म और क्रिया का संबंध सीधे ही स्पष्ट है।

7. 'वह मेरे लिए फल लाया।' और 'मैंने उसके लिए काम किया।' दोनों वाक्यों में 'के लिए' संबंधबोधक है। क्या दोनों में इसका संबंध एक जैसा है?

उत्तर: नहीं, दोनों में संबंध भिन्न है।
पहले वाक्य में: 'के लिए' हितबोधक/उद्देश्यबोधक संबंध बता रहा है। फल लाने का उद्देश्य/लाभ 'मेरा' है। (मेरे हित में)
दूसरे वाक्य में: 'के लिए' कारणबोधक संबंध भी बता सकता है। काम करने का कारण 'उसका' है। (उसके कारण/खातिर)

8. संबंधबोधक अव्यय और परसर्ग में क्या अंतर है? या दोनों एक ही हैं?

उत्तर: दोनों एक ही हैं। 'परसर्ग' हिंदी व्याकरण का पारंपरिक शब्द है जो अव्यय के उस भेद के लिए प्रयोग होता है जो संबंध बताता है। 'संबंधबोधक अव्यय' आधुनिक और अधिक स्पष्ट शब्द है। अंग्रेजी के 'Preposition' के लिए हिंदी में दोनों शब्द प्रचलित हैं।

9. एक वाक्य बनाइए जिसमें 'में' शब्द तीन अलग-अलग भूमिकाओं (संबंधबोधक, क्रियाविशेषण, कारक चिह्न) में से किसी एक के रूप में प्रयुक्त हो।

उत्तर: (संबंधबोधक के रूप में): पानी बर्तन में है। (यहाँ 'में' संज्ञा 'बर्तन' का स्थान संबंध क्रिया 'है' से बता रहा है।)
(क्रियाविशेषण के रूप में): वह अभी में आया। (अशुद्ध/असामान्य प्रयोग। 'में' का क्रियाविशेषण के रूप में ऐसा प्रयोग नहीं होता। सही उदाहरण: वह भीतर आया।)
(कारक चिह्न के रूप में): उसे इस काम में आनंद आता है। (यहाँ 'में' अधिकरण कारक की विभक्ति है, जो 'काम' का संबंध 'आनंद' से बता रही है।)

10. 'सड़क के किनारे एक पेड़ है।' वाक्य में संबंधबोधक अव्यय क्या है? क्या 'किनारे' संबंधबोधक है?

उत्तर: इस वाक्य में संबंधबोधक अव्यय 'के' है (पूरा वाक्यांश 'के किनारे')। 'किनारे' अकेला संबंधबोधक नहीं है; यह एक संज्ञा है जो 'सड़क' का हिस्सा या विशेष स्थान बता रही है। 'के' संबंध चिह्न है जो 'सड़क' और 'किनारे' का संबंध जोड़ता है, और पूरा पद 'सड़क के किनारे' मिलकर एक स्थानबोधक संबंधबोधक की भूमिका निभा रहा है।

10. सारांश

संबंधबोधक अव्यय (Preposition/परसर्ग) भाषा के वे अत्यंत उपयोगी और अनिवार्य तत्व हैं जो वाक्य के विभिन्न अंगों को तार्किक रूप से आपस में जोड़ते हैं। ये सदैव किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध स्थान, समय, कारण, साधन, साथ आदि के रूप में वाक्य की क्रिया या अन्य शब्द से स्पष्ट करते हैं। 'में', 'पर', 'से', 'तक', 'द्वारा', 'के लिए' जैसे ये छोटे-छोटे शब्द वाक्य के अर्थ को पूर्णता और स्पष्टता प्रदान करते हैं। इनके बिना भाषा असंबद्ध और अपूर्ण रह जाती है।

11. संबंधित विषय संकेत

अव्यय का अगला महत्वपूर्ण भेद जानने के लिए आगे पढ़ें: समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction)

📝 संबंधबोधक अव्यय - अभ्यास वर्कशीट

संबंधबोधक अव्यय की पहचान, प्रकार और वाक्य रचना पर आधारित व्यावहारिक अभ्यास।

वर्कशीट खोलें


© 2025 Guided Path Noida | All Rights Reserved