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संबंधबोधक (Preposition) | Hindi Grammar | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 22 JUNE 2026

क्या आपने कभी सोचा है कि 'राम' और 'सीता' – दो नामों को आपस में जोड़ने के लिए हम 'और' का प्रयोग करते हैं? पर अगर हमें यह बताना हो कि 'राम' कहाँ है या किसके साथ है, तो क्या होगा? जैसे – “राम के साथ सीता आई” – यहाँ 'के साथ' बता रहा है कि राम के साथ कौन है। या “राम में बहुत गुण हैं” – 'में' बता रहा है कि गुण किसमें हैं। हिंदी व्याकरण में ऐसे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़ते हैं, संबंधबोधक (Preposition/Postposition) कहलाते हैं। ये अव्यय के प्रकार हैं – इसलिए ये कभी नहीं बदलते। इस पोस्ट में हम संबंधबोधक की परिभाषा, उसके प्रकार, उदाहरण, पहचान के नियम, और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 6‑7 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 6-7 | CBSE एवं UP Board



1. संबंधबोधक – परिभाषा एवं परिचय

संबंधबोधक (Postposition/Preposition) वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों (विशेषकर क्रिया) से जोड़ता है। यह बताता है कि संज्ञा/सर्वनाम का किससे, किसके, कहाँ, कब, कैसे संबंध है। संबंधबोधक अव्यय है – इसलिए कभी नहीं बदलता।

संबंधबोधक की सरल परिभाषा: “जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से जोड़ता है, उसे संबंधबोधक कहते हैं।”

उदाहरण –
  • “राम के साथ सीता आई।” – 'के साथ' ने 'राम' और 'सीता' के आने का संबंध जोड़ा।
  • “किताब मेज पर है।” – 'पर' ने 'किताब' और 'मेज' का स्थान संबंध जोड़ा।
  • “वह स्कूल से आया।” – 'से' ने 'आया' (क्रिया) के साथ 'स्कूल' का संबंध जोड़ा।
  • “राम के लिए खाना है।” – 'के लिए' ने 'राम' और 'खाना' का संबंध जोड़ा।

संबंधबोधक हिंदी भाषा में अत्यंत महत्वपूर्ण है – यह वाक्य को स्पष्ट, सटीक और संबद्ध बनाता है।

2. संबंधबोधक के प्रकार – समानाधिकरण, विषमाधिकरण

हिंदी व्याकरण में संबंधबोधक दो मुख्य प्रकार के होते हैं –

1. समानाधिकरण संबंधबोधक (Coordinate Relation): जब दो शब्दों/वाक्यांशों का समान स्तर का संबंध जोड़ा जाए – 'और', 'एवं', 'तथा', 'व'।
उदाहरण: “राम और श्याम आए।” – 'और' ने दोनों को समान स्तर पर जोड़ा।

2. विषमाधिकरण संबंधबोधक (Subordinate Relation): जब दो शब्दों/वाक्यांशों का असमान (एक दूसरे पर आश्रित) संबंध जोड़ा जाए – 'पर', 'में', 'से', 'के लिए', 'के साथ', 'के बिना', 'बिना', 'के अलावा'।
उदाहरण: “राम के साथ सीता आई।” – 'के साथ' ने 'राम' पर 'सीता' की आश्रितता दिखाई – एक दूसरे पर निर्भर है – यह विषमाधिकरण संबंधबोधक है।

ट्रिक – याद रखें:समान – बराबर का संबंध ('और', 'एवं'); विषम – आश्रित संबंध ('पर', 'में', 'से', 'के लिए')। पहचानें – जहाँ एक दूसरे पर निर्भर हो – विषम; जहाँ बराबर – समान।”

3. संबंधबोधक – उदाहरण तालिका

नीचे दी गई तालिका में संबंधबोधक के विभिन्न शब्दों को उनके प्रकार के साथ वर्गीकृत किया गया है –

समानाधिकरण विषमाधिकरण
औरपर (ऊपर)
एवंमें
तथासे
के लिए
के साथ
के बिना
के अलावा
बिना
ध्यान दें –
  • समानाधिकरण संबंधबोधक दो समान चीज़ों को जोड़ते हैं – “राम और श्याम”, “पढ़ाई तथा खेल”।
  • विषमाधिकरण संबंधबोधक आश्रित संबंध दिखाते हैं – “राम के साथ”, “किताब मेज पर”।
  • संबंधबोधक प्रायः संज्ञा/सर्वनाम के बाद आते हैं – “राम के साथ” – ‘के साथ’ संज्ञा ‘राम’ के बाद आया है – इसलिए हिंदी में इन्हें ‘परसर्ग’ (postposition) भी कहते हैं – अंग्रेज़ी के विपरीत जहाँ ये पहले आते हैं।

4. संबंधबोधक और क्रियाविशेषण में अंतर

संबंधबोधक और क्रियाविशेषण – दोनों अव्यय हैं और अक्सर भ्रमित होते हैं – पर इनका कार्य अलग है –

संबंधबोधक क्रियाविशेषण
संज्ञा/सर्वनाम का संबंध जोड़ता है – “राम के साथ क्रिया/विशेषण/अव्यय की विशेषता बताता है – “धीरे चलता है”
संज्ञा/सर्वनाम के बाद आता है – “राम के लिए कहीं भी आ सकता है – “कल राम आएगा” / “राम कल आएगा”
उदाहरण – “में, पर, से, के लिए, के साथ” उदाहरण – “धीरे, कल, यहाँ, बहुत, इसलिए”
ट्रिक – आसानी से पहचानें: “यदि शब्द संज्ञा/सर्वनाम के साथ उसका संबंध जोड़ रहा है → संबंधबोधक; यदि शब्द क्रिया की विशेषता बता रहा है → क्रियाविशेषण। ‘राम के साथ’ – संबंधबोधक; ‘धीरे चलना’ – क्रियाविशेषण।”

5. वाक्यों में संबंधबोधक का सही प्रयोग

संबंधबोधक का प्रयोग वाक्यों में संज्ञा/सर्वनाम के बाद होता है –

  • समानाधिकरण: “राम और श्याम मित्र हैं।”
    “पढ़ाई तथा खेल दोनों ज़रूरी हैं।”
  • विषमाधिकरण (स्थान): “किताब मेज पर है।”
    “बच्चे बगीचे में खेल रहे हैं।”
  • विषमाधिकरण (समय): “हम सुबह से इंतज़ार कर रहे हैं।”
    “वह शाम को आएगा।”
  • विषमाधिकरण (उद्देश्य/साधन): “राम पढ़ने के लिए पुस्तक लाया।”
    “सीता हाथ से लिखती है।”
  • विषमाधिकरण (संबंध): “राम के साथ सीता आई।”
    “मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”

महत्वपूर्ण: संबंधबोधक अव्यय है – यह कभी नहीं बदलता – चाहे वाक्य में कोई भी संज्ञा/सर्वनाम, लिंग, वचन, या काल हो।



हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “राम और श्याम आए।” – इस वाक्य में संबंधबोधक क्या है और किस प्रकार का है?
उत्तर देखें
उत्तर: 'और' – समानाधिकरण संबंधबोधक
व्याख्या: 'और' ने 'राम' और 'श्याम' – दो समान चीज़ों को जोड़ा है – यह समानाधिकरण संबंधबोधक है।
उदाहरण 2
प्रश्न: “किताब मेज पर है।” – इस वाक्य में संबंधबोधक बताएँ और उसका प्रकार लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: 'पर' – विषमाधिकरण संबंधबोधक
व्याख्या: 'पर' ने 'किताब' और 'मेज' का स्थान संबंध जोड़ा – 'किताब' 'मेज पर' निर्भर है – यह विषमाधिकरण संबंधबोधक है।
उदाहरण 3
प्रश्न: “राम के लिए खाना है।” – इस वाक्य में 'के लिए' किस प्रकार का संबंधबोधक है?
उत्तर देखें
उत्तर: 'के लिए' – विषमाधिकरण संबंधबोधक
व्याख्या: 'के लिए' ने 'राम' और 'खाना' का उद्देश्य संबंध जोड़ा – 'खाना' 'राम के लिए' है – यह विषमाधिकरण संबंधबोधक है।
उदाहरण 4
प्रश्न: “बच्चे बगीचे में खेल रहे हैं।” – इस वाक्य में संबंधबोधक क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: 'में' – विषमाधिकरण संबंधबोधक
व्याख्या: 'में' ने 'बच्चे' और 'बगीचा' का स्थान संबंध जोड़ा – यह विषमाधिकरण संबंधबोधक है।
उदाहरण 5
प्रश्न: “राम के साथ सीता आई।” – इस वाक्य में 'के साथ' संबंधबोधक का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: 'के साथ' – विषमाधिकरण संबंधबोधक
व्याख्या: 'के साथ' ने 'राम' और 'सीता' का संबंध जोड़ा – 'सीता' 'राम के साथ' है – आश्रित संबंध – यह विषमाधिकरण है।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“पढ़ाई और खेल दोनों ज़रूरी हैं।” – इस वाक्य में संबंधबोधक क्या है और किस प्रकार का है?
उत्तर देखें
उत्तर: 'और' – समानाधिकरण संबंधबोधक
प्रश्न 2
“हम सुबह से इंतज़ार कर रहे हैं।” – इस वाक्य में संबंधबोधक क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: 'से' – विषमाधिकरण संबंधबोधक (समय संबंध)
प्रश्न 3
“राम के बिना मैं नहीं रह सकता।” – इस वाक्य में संबंधबोधक बताएँ और उसका प्रकार लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: 'के बिना' – विषमाधिकरण संबंधबोधक
प्रश्न 4
निम्न में से कौन-सा समानाधिकरण संबंधबोधक है? (क) पर, (ख) एवं, (ग) से
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 'एवं' – यह समान स्तर के दो शब्दों को जोड़ता है – समानाधिकरण है।
प्रश्न 5
“वह शाम को आएगा।” – इस वाक्य में 'को' किस प्रकार का संबंधबोधक है?
उत्तर देखें
उत्तर: 'को' – विषमाधिकरण संबंधबोधक (समय संबंध)

संबंधबोधक की समझ क्यों ज़रूरी है?

संबंधबोधक हिंदी भाषा को संबद्ध, स्पष्ट और सटीक बनाता है – यह बताता है कि किसी संज्ञा/सर्वनाम का किससे, किसके, कहाँ, कब, कैसे संबंध है। बिना संबंधबोधक के वाक्य असंबद्ध और अधूरे लगते हैं – “राम आया” बनाम “राम के साथ सीता आई” – दूसरा अधिक जानकारीपूर्ण है। इस पोस्ट में हमने  अव्यय और  क्रियाविशेषण के साथ संबंधबोधक के अंतर को स्पष्ट किया है – अब आप किसी भी वाक्य में संबंधबोधक को आसानी से पहचान सकते हैं और उसका सही प्रकार बता सकते हैं।

अभ्यास से ही संबंधबोधक की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक बातचीत और लेखन में ध्यान दें – 'पर', 'में', 'से', 'के लिए', 'के साथ' – ये किस संज्ञा/सर्वनाम के साथ आ रहे हैं और क्या संबंध जोड़ रहे हैं। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।

📝 संबंधबोधक अभ्यास – कक्षा 6-7

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 वाक्य दिए गए हैं – आपको प्रत्येक वाक्य में संबंधबोधक को पहचानना है और बताना है कि वह समानाधिकरण है या विषमाधिकरण। साथ ही, कुछ वाक्यों में संबंधबोधक को क्रियाविशेषण से बदलकर अर्थ में अंतर देखना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

📖 वर्कशीट खोलें »

उत्तर कुंजी सहित • CBSE एवं UP Board पाठ्यक्रम के अनुरूप



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