प्रसंगानुसार पर्यायवाची भाषा की सूक्ष्मता और लचीलेपन को दर्शाते हैं, जहाँ एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ होते हैं और हर अर्थ के लिए अलग-अलग पर्यायवाची शब्द उपयुक्त होते हैं। 'जल' का अर्थ 'पानी' है तो 'आँसू' भी, और दोनों के पर्याय अलग-अलग हैं। यह समझ भाषा की गहरी पकड़ की निशानी है।
✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 9–10 (मुख्य स्तर) | कक्षा 11–12 (साहित्यिक अध्ययन) | प्रतियोगी परीक्षाएँ
1. प्रसंगानुसार पर्यायवाची: भाषा का उच्च स्तर
अब तक आपने सीखा कि 'पानी' के पर्याय 'जल', 'नीर' हैं। लेकिन जब कवि कहता है "नयनों से जल की धारा बहने लगी," तो यहाँ 'जल' का अर्थ 'आँसू' है। और 'आँसू' के पर्याय 'अश्रु', 'नेत्रजल' हैं, 'नीर' नहीं। यही है प्रसंगानुसार पर्यायवाची की बारीकी। भाषा में ऐसे अनेक शब्द हैं जिनके एक से अधिक अर्थ (शब्द-शक्ति) होते हैं, और हर अर्थ के लिए उसके अलग-अलग समानार्थी शब्दों का समूह होता है। इस स्तर पर सिर्फ़ शब्दों की सूची नहीं, बल्कि अर्थ और प्रसंग की पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह कौशल न सिर्फ़ उच्चस्तरीय परीक्षाओं के लिए ज़रूरी है, बल्कि साहित्य, पत्रकारिता और प्रभावी लेखन के लिए भी अनिवार्य है। जब आप किसी शब्द का 'Context' समझकर उसका सटीक पर्याय चुनते हैं, तो आपकी अभिव्यक्ति दोषरहित और प्रभावशाली बन जाती है।
2. परिभाषा
परिभाषा: किसी बहुअर्थी शब्द के विभिन्न अर्थों के आधार पर, उन भिन्न-भिन्न प्रसंगों में उपयुक्त होने वाले अलग-अलग पर्यायवाची शब्दों का ज्ञान, प्रसंगानुसार पर्यायवाची कहलाता है।
सरल शब्दों में: एक ही शब्द अलग-अलग वाक्यों में अलग-अलग मतलब देता है, और हर मतलब के लिए उसके अपने पर्यायवाची होते हैं।
3. मुख्य बिंदु / पहचान
प्रसंगानुसार पर्यायवाची को समझने के लिए ये सिद्धांत याद रखें:
- बहुअर्थी शब्द (Polysemy): इसका आधार वे शब्द हैं जिनके दो या अधिक सार्थक अर्थ होते हैं। जैसे 'कल' (समय और यंत्र), 'हार' (पराजय और माला)।
- प्रसंग (Context) ही राजा: शब्द का कौन-सा अर्थ प्रयुक्त हुआ है, यह पूरे वाक्य, वाक्यांश या अनुच्छेद के अर्थ से तय होता है। प्रसंग को अनदेखा करके पर्याय नहीं चुना जा सकता।
- पर्यायों का अलग-अलग समूह: एक अर्थ के पर्याय, दूसरे अर्थ के पर्याय से पूरी तरह भिन्न हो सकते हैं। 'अग्नि' (आग) के पर्याय 'पावक', 'हुताशन' हैं, जबकि 'अग्नि' (पाचन शक्ति) का पर्याय 'जठराग्नि' है।
- साहित्यिक एवं लाक्षणिक प्रयोग: अक्सर कविता और साहित्य में शब्दों का लाक्षणिक अर्थ निकलता है, जिसके लिए विशेष पर्याय होते हैं। जैसे 'सिर' (शरीर का अंग) और 'सिर' (नेता/प्रधान)।
4. प्रमुख बहुअर्थी शब्द एवं उनके प्रसंगानुसार पर्याय
यहाँ कुछ चुनिंदा बहुअर्थी शब्द दिए गए हैं जो परीक्षा और साहित्य में अक्सर आते हैं। प्रत्येक शब्द के अलग-अलग अर्थ और उनके अनुरूप पर्यायवाची देखने के लिए बटन पर क्लिक करें।
शब्द 1: जल
- पर्यायवाची: नीर, वारि, अंबु, पय, सलिल, उदक
- प्रसंग (वाक्य): "नदी में जल शीतल है।"
- पर्यायवाची: अश्रु, नेत्रजल, नयनोदक, आँसू
- प्रसंग (वाक्य): "दुःख की बात सुनकर उसकी आँखों से जल बह निकला।"
- पर्यायवाची: दीप्ति, चमक, तेज, कांति (जैसे 'मुखजल' = मुख की चमक)
- प्रसंग (वाक्य): "उसके मुख का जल (तेज) देखते ही बनता था।"
शब्द 2: कल
- पर्यायवाची: आगामी दिन, भविष्य, श्वः, परसों का पहला दिन
- प्रसंग (वाक्य): "कल हम पिकनिक पर जाएँगे।"
- पर्यायवाची: यंत्र, साधन, उपकरण, मशीन, औज़ार
- प्रसंग (वाक्य): "यह एक छपाई का कल है।"
- पर्यायवाची: गणना, हिसाब, संगणना (जैसे 'कलन' या 'गणक')
- प्रसंग (वाक्य): "उसकी कल-पतंग (गणना) बहुत तेज़ है।"
शब्द 3: हार
- पर्यायवाची: पराभव, पराजय, अभिभूति, शिकस्त, उपराजय
- प्रसंग (वाक्य): "युद्ध में उनकी हार निश्चित थी।"
- पर्यायवाची: माला, हार, कंठहार, कंठी, सरसमुन्दरी
- प्रसंग (वाक्य): "उसने सोने का एक सुंदर हार पहना था।"
- पर्यायवाची: त्याग, परित्याग, छोड़ना, उजाड़ना (क्रिया रूप में)
- प्रसंग (वाक्य): "उसने सब कुछ हार (त्याग) कर संन्यास ले लिया।"
शब्द 4: कर
- पर्यायवाची: हस्त, पाणि, भुजा, बाहु, करतल
- प्रसंग (वाक्य): "उसके कर कमल जैसे कोमल हैं।"
- पर्यायवाची: टैक्स, मालगुजारी, महसूल, शुल्क, राजस्व
- प्रसंग (वाक्य): "सरकार ने नया कर लगाया है।"
- पर्यायवाची: किरण, रश्मि, मरीचि, अंशु (जैसे 'करकिरण' = किरणों का समूह)
- प्रसंग (वाक्य): "सूर्य की प्रथम कर (किरण) निकली।"
शब्द 5: पत्र
- पर्यायवाची: चिट्ठी, पाती, लेख, संदेश, पत्रिका
- प्रसंग (वाक्य): "मुझे अपने पिताजी का पत्र मिला।"
- पर्यायवाची: पर्ण, पल्लव, दल, पत्ता, पात
- प्रसंग (वाक्य): "पेड़ का पत्र हरा-भरा है।"
- पर्यायवाची: पंख, पर, छद, डैना (जैसे 'पक्षीपत्र')
- प्रसंग (वाक्य): "मोर के पत्र (पंख) बहुत सुंदर हैं।"
5. वाक्यों में प्रयोग से स्पष्टीकरण
इन वाक्यों में एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ और उनके उपयुक्त पर्याय देखिए:
- उदाहरण 1 (जल): "तालाब का जल स्वच्छ है।" (यहाँ पर्याय: नीर, पानी)
vs "शोक में उसके नेत्रों से जल गिरने लगा।" (यहाँ पर्याय: अश्रु, आँसू) - उदाहरण 2 (अग्नि): "अग्नि में समिधा डालो।" (यहाँ पर्याय: आग, पावक)
vs "उसकी अग्नि (जठराग्नि) ठीक नहीं है।" (यहाँ पर्याय: पाचन शक्ति, जठराग्नि) - उदाहरण 3 (फल): "इस वृक्ष का फल मीठा है।" (यहाँ पर्याय: सिध्, फल)
vs "कठोर परिश्रम का फल अवश्य मिलता है।" (यहाँ पर्याय: परिणाम, नतीजा, सिध्)
6. प्रसंग पहचानने की विधि
किसी भी बहुअर्थी शब्द का सही पर्यायवाची चुनने के लिए इस तीन-चरणीय विधि का पालन करें:
चरण 1: प्रसंग निर्धारण – पूरा वाक्य या अनुच्छेद पढ़ें और तय करें कि दिया गया शब्द वहाँ किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।
चरण 2: अर्थ-समूह याद करें – उस शब्द के उस विशेष अर्थ के लिए ज्ञात पर्यायवाची शब्दों की सूची मानसिक रूप से याद करें।
चरण 3: उपयुक्तता की जाँच – याद किए गए पर्यायों में से वह शब्द चुनें जो व्याकरणिक और अर्थगत दृष्टि से दिए गए वाक्य में पूर्णतः फिट बैठता हो। यदि कोई पर्याय अटपटा लगे, तो वह गलत है।
उदाहरण: "युद्ध में उसकी ____ निश्चित थी।" (रिक्त स्थान के लिए 'हार' का पर्याय)
चरण 1: प्रसंग 'युद्ध' है, तो 'हार' का अर्थ 'पराजय' है।
चरण 2: 'पराजय' के पर्याय – शिकस्त, पराभव, अभिभूति।
चरण 3: सभी फिट बैठते हैं, लेकिन 'पराभव' सबसे सटीक साहित्यिक पर्याय है।
7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ
इस स्तर पर सबसे बड़ी गलती प्रसंग को नज़रअंदाज़ करना है:
- प्रथम अर्थ का आग्रह: किसी शब्द का सबसे प्रचलित अर्थ याद करके उसी के पर्याय हर जगह लगा देना। जैसे 'कर' का अर्थ सिर्फ़ 'हाथ' मानकर "सूर्य की कर" में 'हाथ' के पर्याय लिख देना।
- समानार्थी श्रृंखला का भ्रम: यह मान लेना कि एक शब्द के सभी पर्याय हर अर्थ में काम करेंगे। जैसे 'जल' के पर्याय 'नीर', 'वारि' 'आँसू' के अर्थ में प्रयोग नहीं किए जा सकते।
- लाक्षणिक अर्थ की अनदेखी: साहित्य में अक्सर शब्दों का लाक्षणिक अर्थ होता है। जैसे 'सिर झुकाना' (समर्पण) में 'सिर' का अर्थ 'गर्व' या 'अहंकार' है, शारीरिक अंग नहीं। इसके लिए अलग पर्याय होंगे।
- यौगिक शब्दों में भ्रम: 'राजकुमार' में 'कुमार' का अर्थ 'पुत्र' है, जबकि 'कुमार' अलग से 'युवक' का भी पर्याय है। यौगिक शब्द में मूल अर्थ बदल सकता है।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- उच्चस्तरीय परीक्षाओं (UPSC, SSC, NET) में प्रसंगानुसार पर्यायवाची पर आधारित प्रश्न अवश्य आते हैं।
- प्रश्न अक्सर इस रूप में आता है: "निम्नलिखित में से किस वाक्य में 'X' शब्द का अर्थ 'Y' है?" या "'X' शब्द के लिए दिए गए वाक्य में उपयुक्त पर्यायवाची चुनिए।"
- विकल्पों में अक्सर एक ही शब्द के विभिन्न अर्थों के पर्याय मिला-जुलाकर दिए जाते हैं। सावधानी से प्रसंग देखें।
- यदि प्रश्न में दो वाक्य दिए हों और पूछा जाए कि 'दोनों में 'Z' शब्द के अर्थ भिन्न हैं', तो दोनों वाक्यों में शब्द का प्रयोग देखकर अर्थ का अंतर स्पष्ट करें।
- हमेशा विकल्पों को वाक्य में रखकर पढ़ें। जो विकल्प अर्थ बिगाड़ दे या अटपटा लगे, वह गलत है।
9. 🎯 प्रसंगानुसार पर्यायवाची आधारित चुनौती
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी इस उच्च-स्तरीय समझ का परीक्षण करें।
1. "उसने युद्ध में वीरगति प्राप्त की।" इस वाक्य में 'गति' शब्द के लिए उपयुक्त पर्यायवाची क्या होगा?
2. "कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया।" इस वाक्य में 'उपदेश' के लिए सबसे उपयुक्त पर्यायवाची कौन-सा है?
3. "वह अपने कर्म का फल भोग रहा है।" और "यह वृक्ष मीठे फल देता है।" – इन दोनों वाक्यों में 'फल' शब्द के अर्थ और पर्यायवाची में क्या अंतर है?
पहला वाक्य: 'फल' = परिणाम। पर्याय: परिणाम, नतीजा, सिध्।
दूसरा वाक्य: 'फल' = खाने योग्य उत्पाद। पर्याय: सिध्, फल।
अंतर: पहले में अमूर्त परिणाम का भाव है, दूसरे में मूर्त वस्तु का। पर्याय 'सिध्' दोनों में आ सकता है, लेकिन 'परिणाम' केवल पहले में।
4. "सूर्य की प्रथम किरण निकली।" इस वाक्य में 'किरण' के लिए उपयुक्त पर्यायवाची बताइए जिसमें 'कर' शब्द छिपा हो।
5. "उसकी वाणी में मिठास थी।" इस वाक्य में 'वाणी' के लिए कौन-सा पर्यायवाची सबसे कम उपयुक्त होगा? (क) भाषण (ख) बोली (ग) स्वर (घ) तलवार
6. "राम ने रावण का वध किया।" इस वाक्य में 'वध' के लिए उपयुक्त पर्यायवाची बताइए। क्या 'हत्या' शब्द यहाँ उपयुक्त पर्याय होगा?
'हत्या' शब्द आमतौर पर अनुचित या गैरकानूनी ढंग से मारने के लिए प्रयुक्त होता है। चूँकि राम एक दुष्ट राक्षस का वध कर रहे हैं, यहाँ 'हत्या' शब्द का प्रयोग उपयुक्त नहीं माना जाएगा। 'वध' या 'संहार' ज़्यादा उचित हैं।
7. "मंत्री महोदय ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया।" इस वाक्य में 'संदेश' का उपयुक्त पर्यायवाची क्या होगा? क्या 'पत्र' भी उपयुक्त है?
'पत्र' शब्द आमतौर पर लिखित दस्तावेज़ (Letter) के लिए प्रयुक्त होता है। यहाँ 'संदेश' मौखिक या प्रसारित भी हो सकता है, इसलिए 'पत्र' पूर्णतः उपयुक्त नहीं है, हालाँकि गलत भी नहीं। 'सूचना' या 'समाचार' बेहतर विकल्प हैं।
8. निम्नलिखित में से किस वाक्य में 'अक्षर' का अर्थ 'वर्ण' (Letter) नहीं है? (क) अक्षर ज्ञान आवश्यक है। (ख) वह अक्षर-अक्षर पढ़ता है। (ग) जीवन में अक्षय अक्षरों का महत्व है। (घ) उसके लिए अक्षर पहाड़ हैं।
यहाँ 'अक्षर' का अर्थ 'वर्ण' नहीं, बल्कि 'अविनाशी' या 'शाश्वत' है ('अक्षय' के साथ प्रयोग से स्पष्ट)। अन्य सभी वाक्यों में 'अक्षर' का अर्थ 'वर्ण' ही है।
9. "वह सदा सत्य के मार्ग पर चलता है।" इस वाक्य में 'मार्ग' के लिए कौन-सा पर्यायवाची 'मार्गदर्शन' या 'पथ' अधिक उपयुक्त है? कारण बताइए।
कारण: यहाँ 'मार्ग' का अर्थ है 'रास्ता' या 'दिशा' (सत्य का रास्ता)। 'पथ' इसका सीधा पर्याय है। 'मार्गदर्शन' का अर्थ है 'रास्ता दिखाना' या 'नेतृत्व', जो यहाँ उपयुक्त नहीं है क्योंकि वाक्य में 'चलना' क्रिया है, 'दिखाना' नहीं।
10. आपके पसंदीदा गीत/कविता की एक पंक्ति में से एक ऐसा शब्द चुनिए जिसके एक से अधिक अर्थ हों और उन अर्थों के आधार पर अलग-अलग पर्यायवाची बताइए।
पंक्ति: "राम नाम मनिदीप धरु, जीह देहरीं द्वार।"
शब्द: द्वार
अर्थ 1: दरवाज़ा (Door)। पर्याय: दरवाज़ा, कपाट, गेट, प्रवेश।
अर्थ 2: माध्यम/साधन (Means)। पर्याय: साधन, मार्ग, उपाय, जरिया। (यहाँ पंक्ति में 'द्वार' का अर्थ 'माध्यम' है – जीभ रूपी द्वार के माध्यम से)
10. सारांश
प्रसंगानुसार पर्यायवाची भाषा की सबसे सूक्ष्म और परिष्कृत अवधारणाओं में से एक है। यह हमें सिखाता है कि शब्द अकेले नहीं, बल्कि वाक्य और प्रसंग में अपना अर्थ ग्रहण करते हैं। 'जल', 'कल', 'हार', 'कर', 'पत्र' जैसे अनेक शब्द विभिन्न प्रसंगों में भिन्न-भिन्न अर्थ देते हैं, और उन अर्थों के अनुरूप ही उनके पर्यायवाची निर्धारित होते हैं। इस कौशल के विकास के लिए व्यापक पठन, शब्दों के बहुअर्थी स्वरूप को जानना और प्रसंग को कुशलतापूर्वक पहचानना आवश्यक है। यह भाषा के प्रयोग को सटीक, प्रभावी और सार्थक बनाता है।
11. संबंधित विषय संकेत
पर्यायवाची शब्दों की यात्रा पूरी करने के बाद, अब विपरीत अर्थ वाले शब्दों की दुनिया में प्रवेश करें: कक्षा 4-5 • विलोम शब्दों की अवधारणा (Concept of Antonyms)
📝 प्रसंगानुसार पर्यायवाची - अभ्यास कार्यपत्रक
बहुअर्थी शब्दों के प्रसंगानुसार सही पर्यायवाची चुनने पर आधारित चुनौतीपूर्ण अभ्यास प्रश्न।
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